प्रदेश में नियमावली न बनने के कारण लागू नहीं हो पा रहा हाउस टैक्स से सर्किल रेट को जोड़ने का आदेश

प्रदेश में नियमावली न बनने के कारण लागू नहीं हो पा रहा हाउस टैक्स से सर्किल रेट को जोड़ने का आदेश

प्रदेश में हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने के आदेश को एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन नियमावली न बनने की वजह से यह आदेश लागू नहीं हो पाया है। अब शहरी विकास निदेशालय ने नियमावली शासन को भेजी है, जिस पर कैबिनेट की मुहर का इंतजार है।

दरअसल, पिछले साल फरवरी में हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने के अध्यादेश को राजभवन ने मंजूरी दी थी। इसके बाद शहरी विकास निदेशालय ने इसकी नियमावली तैयार की थी, लेकिन यह नियमावली केवल हिंदी में थी। सालभर बीत गया। नियमावली न बनने की वजह से प्रदेश में कहीं भी हाउस टैक्स को सर्किल रेट से नहीं जोड़ा जा सका।

अब मामले में शहरी विकास निदेशालय ने दोबारा हिंदी के साथ ही अंग्रेजी में भी नियमावली बनाकर शासन को भेजी है। शासन स्तर पर इसका अध्ययन करने के बाद कैबिनेट बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद इसका शासनादेश जारी होगा। माना जा रहा है कि हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने में अभी भी कई माह का समय लग जाएगा

अभी तक कारपेट एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स की गणना होती थी, लेकिन अब नया कानून आने के बाद इसकी कैलकुलेशन का तरीका बदल जाएगा। जिस क्षेत्र में जो भी सर्किल रेट होगा, उसका 0.1 प्रतिशत से एक प्रतिशत तक हाउस टैक्स होगा। मसलन, अगर कहीं सर्किल रेट के हिसाब से किसी प्रॉपर्टी की कीमत एक करोड़ रुपये है तो उसका टैक्स 0.1 प्रतिशत यानी 10 हजार रुपये से लेकर एक प्रतिशत यानी एक लाख रुपये तक होगा।

अगर सर्किल रेट की कैलकुलेशन के बाद किसी का पुराना टैक्स एक प्रतिशत से अधिक यानी एक लाख रुपये से ज्यादा बैठ रहा है तो उसे पुराना टैक्स ही देना होगा। अगर किसी का टैक्स पहले कम था और सर्किल रेट के आधार पर ज्यादा बन रहा है तो उसी हिसाब से नई दरों पर टैक्स जमा कराना होगा। अगले पांच वर्षों में इसमें पांच प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं की जा सकेगी। शहरी विकास एवं आवास सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि हाउस टैक्स को सर्किल रेट से जोड़ने की नियमावली पर अभी निर्णय होना बाकी है। शासन स्तर पर अध्ययन करने के बाद मामला कैबिनेट में जाएगा। इसके बाद ही आगे कोई फैसला होगा।

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